रायपुर,20जनवरी 2026 खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू की गई पारदर्शी, सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित धान खरीदी व्यवस्था किसानों के जीवन में भरोसे और स्थिरता का नया आधार बन रही है। यह व्यवस्था अब केवल धान बेचने की प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि किसानों की मेहनत को सम्मान और सही मूल्य दिलाने वाली व्यवस्था के रूप में स्थापित हो रही है।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम नेवरी निवासी किसान राघो प्रताप ने कोड़ा उपार्जन केंद्र में कुल 41.20 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। शासन द्वारा निर्धारित 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की नीति के तहत उन्हें उनकी पूरी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हुआ। उनका टोकन भले ही ऑफलाइन जारी हुआ था, लेकिन निर्धारित तिथि पर केंद्र पहुंचते ही पूरी प्रक्रिया सरल, सुव्यवस्थित और बिना किसी परेशानी के पूरी हुई। उपार्जन केंद्र पर किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया था। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और व्यवस्थित माहौल ने किसानों को सम्मानजनक अनुभव दिया। धान की तौल डिजिटल तौल कांटे से किसान की उपस्थिति में की गई, जिससे वजन को लेकर किसी भी प्रकार का संदेह या कटौती की आशंका नहीं रही। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई, जिससे किसान का भरोसा और मजबूत हुआ।
किसान राघो प्रताप बताते हैं कि पहले धान बेचने में देरी, भ्रम और अनिश्चितता बनी रहती थी, लेकिन इस वर्ष तकनीक आधारित व्यवस्था ने इन सभी समस्याओं को समाप्त कर दिया है। तय समर्थन मूल्य, स्पष्ट नियम और समयबद्ध प्रक्रिया से न केवल समय की बचत हुई, बल्कि मानसिक तनाव से भी राहत मिली। समय पर धान विक्रय और भुगतान की निश्चितता से अब वे निश्चिंत होकर रबी फसल की तैयारी, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों की योजना बना पा रहे हैं।



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